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रुपये लेकर प्रदर्शन की अफवाह फैला क्षवि धूमिल करने का आरोप ...

500 लेकर प्रदर्शन

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शाहीन बाग की महिला प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर 500-500 रुपये लेकर प्रदर्शन करने वाला वीडियो डालने के लिए अमित मालवीय को एक करोड़ का मानहानि का नोटिस भेजा गया है। प्रदर्शनकारियों ने भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय को उनकी क्षवि धूमिल करने और झूठे आरोपों के माध्यम से आंदोलन खराब करने के लिए एक करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। 

नोटिस में अमित मालवीय से कहा गया है कि उनके द्वारा पोस्ट और प्रसारित किए गए वीडियो में प्रदर्शनकारी 500-700 रुपये लेकर प्रदर्शन करते दिखाए जा रहे हैं। इस तरह के बयान न सिर्फ झूठ हैं बल्कि इनकी वजह से प्रदर्शन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। 

उपराज्यपाल से मिला महिलाओं का प्रतिनिधिमंडल

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रही महिलाएं अब 36 दिन बाद इसका समाधान निकालने की कोशिश कर रही हैं। इसी के तहत आज प्रदर्शनकारी महिलाओं का एक आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से मिलने पहुंचा है। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। माना जा रहा है कि महिलाओं के इस प्रयास से जल्द ही शाहीन बाग में चल रहा प्रदर्शन खत्म भी हो सकता है।

शाहीन बाग में देर रात दिखे कुछ नकाबपोश

शाहीन बाग इलाके में रविवार देर रात कुछ नकाबपोश लोग दिखने की खबर फैल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें सड़क घेरकर प्रदर्शन कर रही महिलाओं की तरफ जाते देखा गया था। उनके मुताबिक, इसी दौरान खबर मिलने पर पुरुष पहुंच गए। उन्हें देखकर सभी नकाबपोश अंधेरी गलियों की ओर भाग गए। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को भी दी। पुलिस इसे महज अफवाह मान रही है।

स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि नकाब पहनकर घूम रहे लोगों की संख्या 10 से 12 थी। उन सभी के हाथों में धारदार हथियार थे। उनके मुताबिक, पूरे इलाके में यह सूचना फैली तो हर कोई धरना स्थल के पास पहुंच गया। लोगों का कहना था कि जेएनयू की तरह शाहीन बाग में भी प्रायोजित हिंसा कराई जा सकती है। उनके मुताबिक, इस पूरे इलाके में रात के समय अंधेरा रहता है। इस वजह से दुुकानों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों में साफ फुटेज नहीं मिल पाई।

पुलिस का कहना है कि शाहीन बाग में अफवाह उड़ने का यह पहला मामला नहीं है। धरना स्थल पर लगभग रोज यह अफवाह उड़ाई जाती है कि भारी संख्या में पुलिस बल उन्हें जबरन हटाने के लिए पहुंच रहा है। इसके बाद वहां स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जुट जाती है।

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